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Elasticity of Demand-मांग की लोच


नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूँ कि आप सभी स्वस्थ और निरोगी होंगे।
दोस्तों जैसे कि आप सभी जाननते हैं कि हम लोग इस समय अर्थशास्त्र को जानने की और
समझने की कोसिस कर रहे हैं.दोस्तों आज अर्थशास्त्र की अगली कड़ी में मैं आप लोगो को मांग की लोच (Elasticity of Demand)
को समझने और जानने की कोशिश करते हैं.तो दोस्तों बिना किसी देरी के आइये शुरू करते हैं-

दोस्तों मैं शिवांश श्रीवास्तव आज आप लोगो लोगो निम्नलिखित विषयों पर बताने की कोशिस
करूँगा -

Elasticity of Demand-मांग  की लोच


1-मांग की लोच की अवधारणा (Concept of elasticity of demand)
2-मांग की कीमत लोच तथा इसकी माप (Price elasticity of demand & its measurement)
3-मांग की कीमत लोच की कोटियां (Degrees of price elasticity of demand)
4-मांग की लोच को निर्धारित करने वाले कारक (Factors determining price elasticity of demand)

दोस्तों हम लोग क्रम से हर एक बिंदु पर अध्ययन करेंगे और उसे समझेंगे तो चलिए शरू करते
हैं -

1-मांग की लोच की अवधारणा (Concept of elasticity of demand)

मांग की लोच,मांग को प्रभावित करने वाले संख्यात्मक तत्त्वों में वृद्धि या कमी होने के फल
स्वरूप मांग की मात्रा में होने वाले कमी या वृद्धि के विस्तार की मात्रा को मापती है.जैसा की मैंने
आपको पिछली कड़ी में बताया कि किसी किसी वस्तु की मांग विशेष रूप से उसकी कीमत,उप
भोक्ता की आय तथा सम्बंधित वस्तु की कीमत पर निर्भर करता है.अतः मांग की लोच से यह
से ज्ञात होता है किसी वस्तु की कीमत अथवा उपभोक्ता की आय अथवा सम्बंधित वस्तुओं की
कीमत में परिवर्तन होने से उस वस्तु की मांग की मात्रा में कितना परिवर्तन हुआ है.


"अर्थात एक वस्तु की कीमत उपभोक्ता की आय तथा सम्बंधित वस्तुओं की कीमत में परिवर्तन होने से
उस वस्तु की मांग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन के माप को मांग की लोच कहा जायगा।"

मांग की लोच मुख्य्तः तीन प्रकार की होती है-
मांग की आय लोच
मांग की कीमत लोच
मांग की आड़ लोच 

2-मांग की कीमत लोच तथा इसकी माप (Price elasticity of demand & its
measurement)

मांग की कीमत लोच वस्तु की अपनी कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा होने वाले प्रति-
शत परिवर्तन का माप है.अथवा मांग की लोच से ज्ञात होता है कि किसी वस्तु की प्रतिशत
कीमत बढ़ने से मांग में कितनी प्रतिशत की कमी होगी तथा कीमत प्रतिशत कम होनें से मांग
में कितने प्रतिशत की वृद्धि होगी।मांग की लोच कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप वस्तु के लिए
मांग की अनुक्रियाशीलता की मात्रा है.

"मांग की कीमत लोच किसी वस्तु की कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा उस वस्तु की
मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात है."

मांग की कीमत लोच का माप-

कुल व्यय विधि 
अनुपातिक या प्रतिशत विधि 
ज्यामितिक विधि 


3-मांग की कीमत लोच की कोटियां (Degrees of price elasticity of demand)

मांग की लोच की स्थितियों का अध्ययन उनकी कोटियों पर निर्भर करता है :-

(a)पूर्णतया लोचदार 
(b)इकाई लोचदार
(c)पूर्णतया बेलोचदार

(d)इकाई से अधिक लोचदार 

(e)इकाई से कम लोचदार 



(a)पूर्णतया लोचदार-



किसी वस्तु की पूर्णतया लोचदार मांग से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें प्रचलित कीमतों पर मांग
अनंत होती है.इस स्थिति में कीमत के थोड़ा सा बढ़ने पर भी मांग शून्य हो जाती है.




(b)इकाई लोचदार-


इकाई लोचदार मांग वह स्थिति है जिसमें कीमत में परिवर्तन होने के फलस्वरूप वस्तु की मांग
में इतना परिवर्तन होता है कि वस्तु पर किया जाने वाला कुल व्यय स्थिर रहता है.

(c)पूर्णतया बेलोचदार मांग-

किस वस्तु की मांग उस समय बेलोचदार होती है जब कीमत में परिवर्तन होने पर मांग में कोई
परिवर्तन नहीं होता है.

(d)इकाई से अधिक लोचदार-

यह वह स्थिति है जिसमें कीमत में परिवर्तन होने के फलस्वरूप वस्तु की मांग में इतना परिवर्तन होता है कि कीमत के कम होने पर उस वस्तु पर किया जाने वाला कुल खर्च
बढ़ जाता है तथा कीमत के बढ़ने पर कुल खर्च काम हो जाता है.

(e)इकाई से कम लोचदार मांग-

यह वो स्थिति है जिसमें वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने के फलस्वरूप वस्तु की मांग में इतना
परिवर्तन होता है कि कीमत के कम होने पर किया जाने वाला कुल
खर्च कम हो जाता है तथा कीमत में वृद्धि होने पर कुल खर्च बढ़ जाता है. 


4-मांग की लोच को निर्धारित करने वाले कारक (Factors determining price elasticity
of demand)

मांग की कीमत लोच को निर्धारित करने वाले घटक निम्न हैं -

(a) वस्तु की प्रकृति-

सामान्यतः यह देखा गया है कि अनिवार्य वस्तुएं की मांग कम लोचदार होती है जबकि विला-
सिता की वस्तुएं की मांग अधिक लोचदार होती है.इसका काऱण यह है कि इनकी कीमत में होने
वाले परिवर्तन का इनकी मांग पर काफी प्रभाव पड़ता है.

(b) स्थापन्न वस्तुओं की उपलब्धि-

जिन वस्तुओं के स्थापन्न उपलब्ध हैं तो उनकी मांग अधिक लोचदार होगी इसका कारण यह है
कि यदि किसी वस्तु की कीमत उसके स्थापन्न की तुलना में कम हो जाती है तो लोग उस वस्तु
की अधिक मात्रा खरीदेंगे।जिन वस्तुओं के स्थापन्न नहीं होते उनकी मांग अपेक्षाकृत बेलोचदार
होती है.

(c) विभिन्न उपयोगों वाली वस्तुएं-

जिन वस्तुओं के विभिन्न उपयोग होते हैं उनकी मांग अधिक लोचदार होती है.

(d) उपभोग का स्थगन-

जिन वस्तुओं के उपभोग को भविष्य के लिए स्थगित किया जाता है उनकी मांग अधिक लोच-
दार होती है और जिन वस्तुओं की मांग को भविष्य के लिए स्थगित नहीं किया जा सकता उनकी
मांग कम लोचदार होती है.

(e) उपभोक्ता की आय-

जिन लोगों की आय बहुत अधिक या बहुत कम होती है उसके द्वारा मांगी जाने वाली वस्तुओं की
मांग साधारणतया बेलोचदार होती हैं.इसका कारण यह है कि कीमत के घटने या बढ़ने का इन
लोगो
द्वारा की जाने वाली मांग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।इसके विपरीत मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा
खरीदी जाने वाली वस्तुओं की मांग लोचदार होती है.

(f) उपभोक्ता की आदत-

लोगों को जिन वस्तुओं की आदत पड़ जाती है इनकी मांग बेलोचदार होती है.इसका कारण यह है
कि उपभोक्ता इन वस्तुओं के बिना नहीं रह सकता।

(g) कीमत स्तर-

मांग की लोच सम्बंधित वस्तु के कीमत स्तर पर भी निर्भर करती है.वस्तु की कीमत के ऊँचे स्त
पर मांग की लोच अधिक होगी और कीमत के नीचे स्तर पर मांग की लोच कम होगी।

(h) समय अवधि-

अल्पकाल में किसी वस्तु की मांग बेलोचदार होती है तथा दीर्घकाल में अपेक्षाकृत अधिक
लोचदार होती है.इसका कारण यह है कि अल्पकाल की तुलना में एक उपभोक्ता अपनी आदत में
सहज रूप से परिवर्तन कर सकता है.


.....**.....

 तो दोस्तों यह थी Elasticity of Demand-मांग की लोच के सम्बन्ध में जानकारी।
आशा करता हूँ की आपको मेरी ये पोस्ट जरूर पसंद आएगी तो दोस्तों अगर आपको मेरी ये पोस्ट
पसंद आती है तो कृपया मेरी पोस्ट को Like,Share और Subscribe जरूर करें।


धन्यवाद


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