ECONOMICS-Theory Of Demand(मांग की अवधारणा)

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप लोग.आशा करता हूँ कि आप सभी बहुत ही अच्छे से होंगे।तो दोस्तों आज हम सभी अर्थशास्त्र की अगली लेख में मांग का सिद्धांत के बारे में जानने की कोशिस करेंगे जिसमे मैं आप लोगो को मांग की अवधारणा,मांग अनुसूची,मांग वक्र,मांग फलन और मांग का नियम इत्यादि के बारे में जानकारी लेंगे।तो आइये दोस्तों बिना देरी किये सुरु करते हैं.

ECONOMICS-Theory Of Demand


मांग की अवधारणा -

आम बोलचाल की भाषा में इच्छा और मांग शब्दों का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता है.परन्तु अर्थशास्त्र में मांग शब्द का विशेष अर्थ होता है.मान लीजिए आपकी रंगीन T.V. लेने की इच्छा है परन्तु आपके पास पर्याप्त धन नहीं है तो यह इच्छा केवल इच्छा ही है मांग नहीं और यदि पर्याप्त धन होते हुए भी आप उस धन को T.V. खरीदने पर खर्च करना नहीं चाहते तो यह इच्छा भी मांग नहीं है.
मतलब 
"किसी वस्तु के लिए मांग से अभिप्राय वस्तु को खरीदने की उस इच्छा से है जिसके लिए पर्याप्त क्रय शक्ति है और खर्च करने की तत्परता है"


मांग अनुसूची -

मांग अनुसूची वह तालिका है जो किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों तथा उन पर खरीदी गयी मात्रा के सम्बन्ध को प्रकट करती है.
अर्थात 
"वह तालिका जिसमें कीमत तथा खरीदी गयी मात्रा के संबंध को प्रगट किया गया है मांग अनुसूची कहलाती है"

मांग की अनुसूची दो प्रकार की होती है -
1-व्यक्तिगत मांग अनुसूची 
2-बाजार मांग अनुसूची


मांग वक्र -



मांग वक्र वह तालिका है जो रेखाचित्र प्रस्तुतिकरण है जो एक वस्तु की विभिन्न संभव कीमतों पर मांगी गयी विभिन्न मात्रा के सम्बन्ध को प्रगट करता है
अर्थात 
"मांग वक्र वस्तु की उन अधिकतम मात्राओं को प्रकट करता है जिन्हे उपभोक्ता समय की एक अवधि में विभिन्न कीमतों पर खरीदेंगे"
मांग वक्र भी दो प्रकार का होता है -
1-व्यक्तिगत मांग वक्र 
2-बाजार मांग वक्र


मांग फलन -

मांग फलन किसी वस्तु की मांग तथा उसके विभिन्न निर्धारक तत्त्वों में सम्बन्ध प्रकट करता है.इससे प्रकट होता है कि किसी वस्तु की मांग उस वस्तु की कीमत या उपभोक्ता की आय या अन्य तत्त्वों से किस प्रकार सम्बंधित है.
मांग के दो पहलुओं अर्थात व्यक्तिगत मांग तथा बाजार मांग से सम्बंधित मांग फलन भी दो प्रकार का होता है-
1-व्यक्तिगत मांग फलन
2-बाजार मांग फलन

मांग का नियम -

मांग का नियम यह बताता है कि -
"अन्य बातें समान रहने पर,किसी वस्तु की कीमत बढ़नें पर उसकी माँग का संकुचन हो जाता है तथा कीमत कम होने पर उसकी मांग में विस्तार हो जाता है."
अन्य शब्दों में यदि मांग के अन्य निर्धारक तत्त्व अपरिवर्तित रहें तो किसी वस्तु की मांगी गयी मात्रा तथा उसकी कीमत में विपरीत सम्बन्ध होता है.अन्य बातें या अन्य निर्धारक तत्त्व समान रहने से अभिप्राय है की आय उपभोक्ता की रूचि एवं प्राथमिकता तथा सम्बंधित वस्तुओं की कीमत स्थिर रहती है.

"मांग का नियम यह बतलाता है की अन्य बातें समान रहने पर कीमत के घटने से वस्तु की मांगी गयी मात्रा बढ़ती है और कीमत के बढ़ने पर मांगी गयी मात्रा घटती है."


आशा करता हूँ दोस्तों की आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी जरूर पसनद आएगी।अगर आपको मेरी द्वारा दी गयी जानकारी पसंद है तो कृपया मेरी पोस्ट पर LIKE SHARE और सब्सक्राइब जरूर करें.

धन्यवाद दोस्तों।





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